बारिश

पिछले 26 घंटों से लगातार बारिश हो रही थी. तड़के 6 बजे जब अखबारवाले ने दस्तक दी तो साहेब बोले, भाई आज ज़रा हिंदुस्तान और प्रभात दोनों दे देना. अखबारवाला शायद कुछ बडबडाया और अखबार फेंकता हुआ चला गया. शायद ही उसपर बारिश का कोई प्रभाव पड़ रहा था. अखबार बेचने में इतना संलग्न हो गया था की मुख्य पेज पर छपे जोरदार बारिश के पूर्वानुमान को भी न पढ़ सका. वर्मा जी , शर्मा जी , मेहता जी , हाँ सबको दे दिया, घर लौटते वक्त उसने याद किया. कल ही शर्मा जी से डांट पड़ी थी. सात की जगह आठ बजे जो अखबार फेंका था. ठाट के जीवन में शर्मा जी शायद यह भूल गए थे की यह अखबारवाला इस तेज बारिश में मीलों साइकिल चला कर अखबार डालता है. आज तडके अखबार मिला तो ख़ुशी की कोई सीमा न थी. अखबार खोलते ही भयावह बारिश के तीक्ष्ण दृश्यों के दीदार हो गए. साहेब एक टूक उन चित्रों को देखे जा रहे थे. सुर्ख़ियों में से प्रमुख थे – रिकोर्ड़तोड़ बारिश; रांची में इन्द्र देव का कला साया; 26 घंटे से सूर्य देव के दर्शन दुर्लभ; प्रलय का पूर्वानुमान – होगी जोरदार वर्षा; बारिश से फिलहाल राहत नहीं, वगैरह वगैरह. लगता था सम्पूर्ण अखबार बारिश के छींटों से सराबोर था. फिर साहेब ने खिड़की खोल बाहर झाँकने का प्रयास किया. एकाध छींटे चेहरे पर पड़े पर सामने जो दृश्य था उसने उनके आँखों को खोल दिया. सड़क पर घुटने भर पानी जम गया था. तपाक से खिड़की बंद की और जाकर टी वी सेट के सामने बैठ गए.

नगर न्यूज़ चैनल पर भी बारिश ने कब्ज़ा कर रखा था. शायद इन्द्र देव आज सर्वत्र राज करने के इरादे से आये थे. टी वी पर देखा कि फिरायालाल, लालपुर, कांटाटोली, बरियातू आदि सभी जगहों की एक-सी स्थिति थी. जहाँ घंटों जाम लगा रहता था वहां लगता था मानो क्रिकेट के खेल में वर्षा के कारण खेल प्रभावित हो और मैदान को खाली कर दिया गया हो. बारिश की बूंदों को कैमरे ने इतनी सूक्ष्मता से कैद किया था कि लगता था टी वी सेट ही भींग जायेगा. वे सोचने लगे – जब आम लोग इस तूफ़ान में विचरण करने में असमर्थ हैं ऐसे में ये टी वी रिपोर्टर कैमरे के साथ जगह जगह कैसे पहुँच जाते हैं. उन्होंने गौर किया था कि बारिश के बाद वाले दिन अखबार में ख़बरों की संख्या में भरी गिरावट दर्ज की गयी. शायद उन्हें इसका कारण स्पष्ट दिख रहा था. अक्सर होने वाले रांची और झारखण्ड बंद में भी शायद ऐसा खालीपन न होता था. लग रहा था मानो रांची की सड़कें अपनी नग्नता को देखकर शर्मा रहीं हो. साहेब को बारिश बिलकुल भी पसंद न थी. मैडम को आर्डर किया – ऐ जी, ज़रा गरमागरम चाय बनाना तो नींबूवाला. चाय की चुस्की लेते – लेते वे सम्पादकीय पेज पर पहुंचे. चेहरे से स्पष्ट था कि यह पेज उनके लिए बोरियत से ज्यादा कुछ न था. बगल में बैठी मैडम को दिखाने के लिए इधर – उधर अखबार पर नज़रें दौड़ाए और पन्ना पलट दिया. अंत के पन्नो को तो लोग सबसे पहले पढ़ा करते हैं सो उनका ‘हिंदुस्तान से युद्ध’ समाप्त हुआ. ‘प्रभात’ पार सरसरी निगाह दौड़ाई तो पाया की आधिकांश खबरें तो पुरानी निकली. ‘प्रभात के अंत’ आने में समय न लगा. अभी अखबार बंद ही किया था की एक और दुर्घटना घटित हो गयी – बिजली चली गयी. वे गुर्राए – ये बारिश आने से पूर्व सूचना दे देती है परन्तु ये कमबख्त बिजली हर बार बिना बताये गायब हो जाती है.

दौड़ता हुआ उनका 12 साल का छोटा लड़का उनके गोद में आया. साहब को उसके संभावित प्रश्न का बोध था – पापा पापा, लाइट कब आएगा, बताइए न प्लीज! फ़ोन करके बुला दीजिये न! साहब निरुत्तर रह गए भला उनके पास बिजली का फ़ोन नंबर कहाँ से आता. पर बाल मन चंचलता से ओतप्रोत था – पापा, केवल दो लेवल बाकी था. पूरा गेम ख़त्म कर देते आज. ये वाला पार हो जायेगा तो बगल में रहने वाले गोलू को पीछे कर दूंगा. उसके बाद 6 जीबी का गेम भी लूँगा. पापा मुझे गेम खेलना है, लाइट को बुलाइए न. साहब लड़के की कोई सहायता नहीं कर सकते थे. उन्होंने उसे अपना श्वेत – श्याम मोबाइल फ़ोन उसे थमा दिया – ले बेटा इसी से संतोष कर. पिताजी के हाथ से मोबाइल झपटकर वह अपने कमरे की और दौड़ा और पुनः मशगूल हो गया.

सारे कमरे अंधकारमय हो गए थे. शुक्र था की मैडम ने सुबह का नास्ता तैयार कर लिया था. शायद आज उन्हें candlelight breakfast का सौभाग्य प्राप्त हो. फिर भी मैडम परेशान थी. उनका पसंदीदा सीरियल आज छूट जायेगा. लेकिन मन में आशा की एक लकीर अवश्य थी – शाम में काम से फुरसत निकल कर इसका पुनःप्रसारण जरूर देखूँगी; एक एपिसोड अगर छूट गया तो आगे की कहानी न समझ आएगी. उन्हें याद आया उनके बड़े लड़के, जो हरि ॐ टॉवर में कोचिंग करता है, ने एक दफा कहा था – अगर एक क्लास मिस हो गया तो अगले क्लास में सब ऊपर से पार होता है. साहब उठते हैं और कमरे के दो पूर्ण चक्कर लगाते हैं. वो और कर भी क्या सकते हैं – इस बारिश ने सबको घुटने जो टेकने पर मजबूर कर दिया है …..

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