काउंटडाउन, Exams और डांडिया नाईट

51 दिन हो गए कॉलेज आये हमे

51 दिन और 51 रातें….

और हर गुज़रते दिन में संजोते ढेरों यादें! BIT के जीवन को समझने के लिये शायद 50 दिन काफी नहीं, तब जबकि कॉलेज में अग्रज-अनुज सहिष्णुता पर DSW के ग्रहण की छाया हो.., तब जब सुबह आठ बजे से शाम पांच बजे तक के जटिल घंटों में कोई युवा मन पढ़ाई की इच्छा न रखता हो- प्रोफेसर के आने का पता नहीं पर उनके कक्षा से जाने की फ़िक्र सबको रहती हो.., तब जब हॉस्टल से कॉलेज 1 किलोमीटर दूर हो और शरीर पे सवार थकान कहती हो- ‘यार, स्कूल लाइफ ही बढ़िया थी!’…, तब जब भूखा पेट सोयाबीन, करी और मिक्स-वेजीटेबल देखकर ही स्वतः आधा भर जाता हो.., जब सलाद और नींबू ‘Dish of the Day’ बन जाते हो.., तब जब पढ़ाई से ज्यादा फ़िक्र प्लेसमेंट और कमाई की हो.., तब जब न्यूज़ सुनने टी.वी. रुम जाओ तो वहां 9XM और Star Movies पर कोई अंग्रेजी फिल्म चलता मिले.., तब जब रोज़-रोज़ की बारिश और रांची का ठंडा-सुहाना मौसम बिस्तर पर चिपके रहने को मजबूर कर दे.., तब जब Facebook और WhatsApp फासलों को दूर कर दे.., तब जब कॉलेज में कोई ‘आकाश जैन’ हो और कोई ‘देवाशीष पण्डे’ भी हो.., तब जब परीक्षा के नजदीक आने का एहसास परिक्षा की पूर्व रात्री को हो.., तब जब प्रोफेसर iPad और PowerPoint Presentation से पढ़ाएं और सारे नोट्स बच्चों को e-mail कर दें.., तब जब PMC 7 बजे रात तक गुलजार रहकर न जाने कितने रिश्तों को बनाता-बिगाड़ता हो.., तब जब क्लबों की संख्या गिनती मात्र हो और इच्छुकों की असंख्य भीड़ हो और Recruitment के लिए Personal Interview और Group Discussion का सामना करना पड़े.., तब जब कमरे में दुबका शायर शायरी लिखता है और बाहर बरामदे में कोई Guitar पर राम-धुन छेड़ता हो…

BIT आखिरकार एक रंगीन दुनिया ही तो है… शायद कितने रंगों से सराबोर होना अभी बाकी है!!

खैर नींद खुल चुकी है, 2 दिन बाद से Mid-semester Exams हैं, किसी को पता नहीं क्या होगा, कैसा होगा- आग़ाज़ अक्सर विस्मृत और आश्चर्यचकित कर देता है! परीक्षा का काउंटडाउन तो आने के दिन से शुरू हो गया था- तब 50 दिन बाकी थे और अब मात्र 2 दिन! आशा है सबों ने तैयारी प्रारंभ कर दी होगी| मित्रों को शुभकामनाएं- परीक्षा और नवरात्र दोनों की!

कल आयोजित डांडिया नाईट तो औपचारिकता मात्र थी नवरात्र के प्रारंभ की! डांडिया और गरबा की धुन पर जमकर थिरके कदम; नवरात्र का इससे सुन्दर और मनोरंजक आग़ाज़ शायद ही देखने को मिलता! पश्चिमी भारतीय वेशभूषा, स्वस्थ आयोजन और दर्शकों-नर्तकों के भरपूर जोश ने सबके दिलों को छू लिया! पता नहीं कैसे पर शीघ्र ही पारंपरिक गीत-संगीत को क्षीण करते हुए आधुनिक संगीतकारों ने नृत्य के मंच पर अपना दबदबा कायम कर लिया! अपने नाम के विपरीत ‘डांडिया नाईट’ देखते ही देखते ‘पार्टी ऑल नाईट’ में तब्दील हो गया! नर्तकों का उत्साह दो से चार गुना बढ़ गया था- समय की मांग, यो यो हनी सिंघः के गानों ने अगले एक घंटे तक थिरकते कदमों को थमने नहीं दिया! नाच ऐसा कि जिसे देखकर बाराती भी शरमा जाएँ! नृत्य में फूहड़ता अपने चरम पर थी और कॉलेज जीवन का आग़ाज़ हो चला था…

शायद इसे कहते हैं hip-hop, hip-hop…!!

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